जेडी ची वाडी
ख़ामोशी एक बड़ी सजा है
पर कहते है उसका भी अपना मजा है
हसना चाहता हूँ मगर कैसे
मेरा एक घाव अभी तक ताजा है
रोने के इरादे से रो नहीं सकता कोई
आँखों के झरने है ख़ाली और ना कोई बादल गरजा है
खुशियाँ मनाऊं कैसे जब मुझपे मेरे मन का कर्जा है
घर जाना चाहता हूँ जब एक अनसुनी आवाज ने संदेसा भेजा है
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