देवनागरी
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कव्वाली

हम तो है सिर्फ आप के ऐलान किजीये शनिवार, ३१ जुलै २०१०, २३:११ (+०५:३०)

यशवंत कुलकर्णी अथ यश उवाच Yashwant Kulkarni

मुझपे भी रहम मेरे मेहरबान किजीए, ए मेहेरबान किजीए
मुश्किल हमारे दिल की भी आसान किजीए जरा आसान किजीए
गुलशन में चल रही है बहारों की छेडछाड, मैदान-ए-मोहब्बत में निकल आये शयसवार
तीर-ए-नजर का हम को भी कर लिजीए शिकार
हम तो है सिर्फ आप के...ऐलान किजीये जरा...ऐलान किजीये...
बेहोश दिल को दर्द के औसान ...

चढता सूरज धीरे धीरे ढलता है ढल जायेगा शनिवार, ०३ एप्रिल २०१०, १६:१७ (+०५:३०)

यशवंत कुलकर्णी अथ यश उवाच Yashwant Kulkarni

हुये नाम वै बेनिशां कैसे-कैसे
जमीं खा गई नौजवां कैसे-कैसे
आज जवानी पर इतराने वाले काल पछतायेगा
चढता सूरज धीरे धीरे ढलता है ढल जायेगा
तु यहां मुसाफ़ीर है, ये सराय फ़ानी है
चार रोज की महेमां तेरी जिंदगानी है
जन-जनी, जर-जेवर कुछ ना साथ जायेगा
खाली हाथ आया है, खाली हाथ जायेगा
जान कर भी अनजाना बन रहा है दिवाने
अपनी उम्र फ़ानी पर, तन रहा है दिवाने
इस कदर तु खोया है, इस जहां के ...