अथ यश उवाच Yashwant Kulkarni
मुझपे भी रहम मेरे मेहरबान किजीए, ए मेहेरबान किजीए
मुश्किल हमारे दिल की भी आसान किजीए जरा आसान किजीए
गुलशन में चल रही है बहारों की छेडछाड, मैदान-ए-मोहब्बत में निकल आये शयसवार
तीर-ए-नजर का हम को भी कर लिजीए शिकार
हम तो है सिर्फ आप के...ऐलान किजीये जरा...ऐलान किजीये...
बेहोश दिल को दर्द के औसान ...