कल, मार्चकी दूसरी तारीखको मेरा जनमदिन था. मेरी उम्रमें इक साल और बढ गया कल. दिन गुजरते गुजरते मै कुछ लिख पाया… वहीं दो कवितायें एकसाथ यहां पोस्ट कर रहा हूं.
इक और साल गुजरा
बिती उमरने लिख रख्खे पन्ने
आंखो सामने फडफडाने लगे
कुछ शब्द थे, कुछ थी विरानियां
कुछ खुशीसे लदबद आंसू
कुछ हंसती कहानिया
कहीं भरी पडी थी
काली स्याही
कहीं निली, कहीं लाल भी
वो लिख्खी बातें ...