कै. श्री. हरिवंशराय 'बच्चन' ह्यांच्या मधुशाला ह्या रुबाईसंग्रहातील काही रुबायांचा भावानुवाद करण्याचा हा प्रयत्न आहे.
मधुशाला- १
मधुशाला-२
मधुशाला-३
मधुशाला-४
मधुशाला-५
मधुशाला-६
कल? कल पर विश्वास किया कब करता है पीनेवाला
हो सकते कल कर जड़ जिनसे फिर फिर आज उठा प्याला,
आज हाथ में था, वह खोया, कल का कौन भरोसा है,
कल की हो न मुझे मधुशाला काल कुटिल की ...