देवनागरी
Roman
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Hindi Poetry

अपना आसमान शुक्रवार, २७ जून २००८, ००:१९ (+०५:३०)

स्नेहा---स्नेहासक्त Swapnanchi Duniya

बिखरे हुए लब्जोंको जोड के तो देखो
बिच खडी दिवारोंको तोड के तो देखो
ये दुनिया बडी हसीन है मेरे दोस्त
प्यार भरी चादर ये ओढ के तो देखो

सिर्फ़ इटोंका घर बन नही सकता
बिना जोडे कण जूड नहीं ...