क्यो मन अब मेरा गुमसूम रहता है?
ना जाने क्यो अब ये तनहा मगसूस करता है?
मेरी तलाश कब रुके, कब मिले दिलको राहत?
कया कहे तुजसे ऐ जालिम, कितनी हमे है तुजसे चाहत।
क्यो अब मेरी ये आँखे तुजको धुंडती है?
तू रहे सामने, तो इन्हे जन्नत दिख जाती है।
धूंडे हर जगह, कही तो महसूस हो तेरी आहट।
क्या कहे तुजसे ऐ जानम, कितनी हमे है तुजसे चाहत।
क्यो धडकने ...