देवनागरी
Roman
Press F12 to toggle

भजन

.... एक भजन .. माझ्या आवडीचे .. शुक्रवार, १३ जून २००८, १७:१२ (+०५:३०)

the social insect ...भुंगा!

जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
मिल जाए तरुवर की छाया
सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
मिल जाए तरुवर की छाया
ऐसा ही सुख मेरे मन् को मिला है
मैं जब से शरण तेरी आया , मेरे राम

सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
मिल जाए तरुवर की छाया

भटका हुआ मेरा मन् था कोई मिल न रहा था सहारा - 2
लहेरों से लड़ती हुई नाव को - 2
जैसे मिल न रहा हो किनारा
मिल न रहा हो ...