देवनागरी
Roman
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Poems - Hindi

क्या है, और क्या नहीं सोमवार, ३१ मार्च २००८, २०:२५ (+०५:३०)

Aseem Creative Juices

ऐसा नहीं की मेरे पास वक़्त नहीं
पर गुजारें किसके साथ - कोई हमसफ़र नहीं

कागज़ भी है, कलम भी, और स्याही भी
पर क्या लिखूँ - लब पे कोई लब्ज़ नहीं

आँख का लहू - सीताराम चंदावरकर ... २००८ बुधवार, ३० जानेवारी २००८, २२:५२ (+०५:३०)

Aseem Creative Juices

तेरे बज़्म से उठ के चले जाने की खूब सज़ा पायी है
आँख मे खून के बहने से मैंने नज़र ही गंवायी है

"जो आंख ही से न टपके वो लहू क्या हो?" कह गए गालिब
उन के इस दर्दभरे मिस्रे की आज बहुत याद आई है

फ़िर भी मेरे ज़ब्तो सब्र की कमाल तो देखिये दोस्तो
उस लहू की एक भी बून्द मेरी आंख से टपक न ...

क्या होगा - सीताराम चंदावरकर ... २००६ मंगळवार, १५ जानेवारी २००८, २०:३८ (+०५:३०)

Aseem Creative Juices

गर मिट गया अँधेरा
तब दीवाली का क्या होगा

बुझ जाती प्यास एक घूँट से
मधुशाला का ...