देवनागरी
Roman
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हिंदी

कोशिश शुक्रवार, २९ ऑगस्ट २००८, १०:२१ (+०५:३०)

Sneha शोध स्वतःचाच...

जैसे वे सब को देती है
वैसे उसने मुझे भी गम दिये
पर उस हर एक गम के
साथ खुशियों को जिने का
तरीका भी बताया ...

मस्ती सोमवार, ०३ एप्रिल २००६, १७:२३ (+०५:३०)

उदयराज बाळ माझ्या कवीता

मैं गाने वाला पंछी
     नित नये गीत मैं गाऊँ
कोई सुने या ना सुने
     मैं अपना जी बहलाऊँ ||

मैं रमता झुमता जोगी
     मै अपनी धुनी रमाऊँ
कोई आये या ना आये
     मैं चलता चला जाऊँ ||

मैं उडता फिरता ...